who is the real mentor ? असली गुरु कौन है ?

ये सवाल का जवाब सभी के पास होगा कि "असली गुरु कौन है ?"। आपने बोलेंगे कि जो हमे अच्छे रास्ते दिखाते हैं, वो असली गुरु होते हैं। आप एक बार सोच के देखिए, क्या वास्तव में जो कोई भी हमे सही रास्ते दिखाते हैं, वो हमारे लिए असली गुरु होते हैं। नहीं, जैसे एक जंगल में सारे सेर राजा नहीं बन सकते हैं, वैसे ही सारे सही रास्ते दिखाने वाले इनसान हमारे लिए असली गुरु नहीं बन सकते हैं। अगर अभी भी आपको समझ में नहीं आ रहा है, तो में आपको एक कहानी के माध्यम से समझाता हूं। 

     जापान में एक लड़का था जिस का नाम था वकायो। बचपन से वकायो कराटे का बहत अनुरागी था। हमेशा वो उसका पीता को बोलता था कराटे सीखने केलिए। पहले पीता उसको कराटे सिखाने केलिए नाराज थे। जब जब वकायो का उमर बढ़ता गया उसके अंदर कराटे को लेकर उत्साह बढ़ता गया। 
     आख़िर में वकायो का उत्साह के सामने पिताजी को हारना पड़ा। पिता उसको कराटे सीखने की अनुमति दिए। वो कराटे सीखने केलिए सेहर जाने का बंदोबस्त किया गया। जब वकायो पिताजी के साथ तालीम केलिए  सहर को गाड़ी में जा रहा था, रास्ते में उसका एक बहत बड़ी दुर्घटना हुआ। ये  दुर्घटना इतना भयानक था कि इस दुर्घटना में उसका बांए हात कट गया।
        वकायो पूरी ६ महीने तक बिस्तर में पड़ा रहा। वो पूरी तरह से ठीक हो जाने के बाद पिताजी को कराटे केलिए फिर से बोला। लेकिन उसका पिता वकायो का हालत देखते हुए पहले कराटे केलिए राजी नहीं हो रहे थे। बाद में पिताजी उसको  फिर से अनुमति दिए।
      अब वकायो को एक अच्छे प्रसिख्यक के पास सही सलामत छोड़ दिया गया। जब गुरुजी वकायो को पहले बार देखे तो उसको  पूछे की "तुम क्यूं कराटे सीखना चाहते हो ?" वकायो जवाब दिया कि " मुझे कराटे के अलावा दुनिया में कुछ दिखता नहीं"। गुरुजी  ये सुनके बहत खुश हो गए और  अगले दिन ही उसका तालीम सुरु कर दिए।
     गुरुजी उसको एक किक सिखाए और बोले कि तुम उसको लगातार अभ्यास करो। दिन के बाद दिन बीतता गया वकायो वही एक किक को अभ्यास कर रहा था। वकायो देख रहा था कि दूसरे लड़को को तरह तरह की तरीका सिखाया जाता है लेकिन वो एक किक को अभ्यास कर रहा है।
वो एक दिन गुरुजी को इसके बारे में बोला की " मुझे कुछ नया क्यूं नहीं सिखाते हैं, में एक किक को अभ्यास कर रहा हूं"। गुरुजी ने बोले वही किक को और अभ्यास करो। वकायो फिर से अभ्यास में लग गया। इस में २ साल बीत गया लेकिन वो एक किक को अभ्यास कर रहा था।
      फिर से एक दिन वकायो गुरुजी को बोला कि " आप दूसरे लड़को तरह तरह की प्रक्रिया सिखाते हैं लेकिन मुझे कुछ सीखा नहीं रहे हैं"। गुरुजी गुसे में बोले "जो बोल रहा हूं ,वही करो। अगर मेरे ऊपर यकीन नहीं कर सकते हो, तो घर वापस चले जाओ "।
        इस बार वकायो कुछ नहीं बोला बस एक किक को अभ्यास करता रहा। इस में पूरी ८ साल बीत गया, लेकिन वो एक किक को अभ्यास करता रहा। जब उसका १८ साल उमर हो गया, उसको प्रतियोगिता में जाने का अनुमति दिया गया।
        पहले वकायो और एक लड़का के बीच में प्रतियोगिता हुआ। वकायो को ऐसा लग रहा था कि क्या में उससे जीत पाऊंगा, में तो एक किक सीखा हूं। 
         प्रतियोगिता सुरु हुआ। वकायो डरते हुए वो लड़का को एक किक मारा , वो लड़का दुबारा उठ नहीं पाया और वकायो जीत गया।
      वैसे ही २य राउंड में भी वकायो की जीत हुई। चारो तरफ लोग वकायो का नाम गूंजने लगे।
        अब बारी आई आख़िर राउंड कि। आख़िर राउंड जिसके साथ था ,वो लगातार  पिछले ५ साल से जीतता आ रहा था। लोग बोलते हैं कि वो जब कीसिके साथ लड़ता है तो सामने वाले को हमेशा बुरी तरह से मरता है। ये सुनके वकायो पूरी तरह से घबरा गया। वो डर डर होकर मंच को गया।
दोनों के बीच में लड़ाई सुरु हुआ। पहले वकायो सामने वाला का मुकाबला नहीं कर पाया और वो  बुरी तरह से मार खाने के बाद गिर गया। अब फिर से वकायो उठा और डरते हुए सामने वाला को एक किक मारा । 
        अब सारे लोग  ये देखकर स्तंभित हो गए की जो पिछले ५ साल से जीतता आ रहा था वो वकायो की एक किक में गिर गया और दोबारा खड़ा नहीं हो पाया।
       सारे राउंड ख़तम होने के बाद वकायो प्रतियोगिता जीत गया। वकायो खुद यकीन नहीं कर पा रहा था कि वो जीत चुका है।
     सब ख़तम होने के बाद वकायो गुरुजी के पास गया और पूछा "आप तो मुझे एक किक सिखाए थे, में प्रतियोगिता केसे जीत गया"।
गुरुजी ने उत्तर दिए "तुम तो उस दिन जीत थे जिस दिन तुम्हारा एक हात ना होने के बावजूद भी कराटे सीखने का निर्णय लिए थे"। में तुमको जो किक सिखाया था वो कराटे दुनिया में सबसे मुश्किल किक था और अगर कोई उस किक का मुकाबला करना चाहे तो वो सामने वाले का बाएं हात को पकड़ कर पलटा सकता है । लेकिन तुम्हारे पास बाएं हात ही नहीं ,इसलिए तुम जीत गए। ये सुनके वकायो गुरुजी को क्ष्यमा मांगी। उस दिन उसको ये पता चला कि वो गुरु कितने महान थे।
          ये छोेटिसि कहानी हमको बहत कुछ सीखता है कि अगर हम एक ऐसे गुरु के पास जाते हैं जो हमारा कमजुरी को भी सक्ती में बदल दे, वो होते है असली गुरु।

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